रक्षा मंत्रालय ने 57 छावनी बोर्ड के चुनाव कराने का गजट जारी कर दिया। लखनऊ समेत 56 अन्य छावनी बोर्ड के चुनाव 30 अप्रैल से पूर्व कराए जाने हैं। दो साल बाद लखनऊ छावनी बोर्ड का चुनावी गजट जारी होने से चुनावी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। छावनी परिषद आठ वार्डों में बंटी हुई है। पिछली बार 10 फरवरी 2015 को छावनी परिषद का चुनाव हुआ था। पांच वर्ष बाद परिषद का कार्यकाल पूरा हुआ, लेकिन चुनाव नहीं हुए। इसके बाद सदस्यों को एक साल का विस्तार दिया गया। दो साल विकास की बागडोर वैरी बोर्ड के हाथ में आ गई।

पुरानी व्यवस्था पर ही चुनाव

अखिल भारतीय छावनी परिषद महासंघ के राष्ट्रीय महासिचव रतन सिंघानिया ने बताया कि छावनी परिषद अधिनियम 2020 में उपाध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराने और उनको अधिक अधिकार देने का प्रस्ताव किया गया था। हालांकि यह अधिनियम पास नहीं हो सका, इसलिए पुरानी व्यवस्था से ही चुनाव होंगे। आठों वार्ड से आठ पार्षदों को जनता सीधे चुनेगी। वहीं, पांच सदस्यों के बहुमत वाला प्रत्याशी उपाध्यक्ष के रूप में चुना जाएगा। महासंघ चुनाव के बाद एक बार फिर उपाध्यक्ष का चुनाव छावनी परिषद अधिनियम 2020 के संशोधन के अनुसार कराने की मांग करेगा।

बिना नामित सदस्य के दो साल तक चला वैरी बोर्ड

वैरी बोर्ड में मध्य यूपी सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग अध्यक्ष और परिषद के सीईओ सदस्य सचिव शामिल रहे। वहीं, दो साल तक जनता की ओर से नामित प्रतिनिधि के मनोनयन की कार्यवाही लटकी रही। रक्षा मंत्रालय को पांच नाम भेजे गए, लेकिन मनोनयन लंबित रहा। वर्ष 2015 के छावनी परिषद चुनावों में करीब 50 हजार मतदाता शामिल रहे। हालांकि छावनी बोर्ड द्वारा अभियान चलाकर अतिक्रमण करने वाली बस्तियों के मतदाताओं का नाम सूची से काट दिया गया। इसलिए इस बार पिछले चुनाव की अपेक्षा मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा।

एक हफ्ते में तैयार होगी रणनीति

मेरे कार्यकाल में पहली बार चुनाव हो रहा है। चुनाव संबंधी सभी नियम कानूनों को देख समझ कर अगले एक हफ्ते में चुनावी प्रक्रिया की रणनीति तैयार करेंगे।

– विलास एच पंवार, मुख्य अधिशासी अधिकारी, छावनी परिषद



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